Wednesday, 8 July 2015

चौमासा

              कजरी

रंगबे  लाली - रंग  मोर लुगरा बरेठिन 
किनारी  म  हरियर  लगाबे -  बरेठिन ।

सब्बो - संगवारी - संग तौरे बर - जाबो 
भींजे  ले  छूटय  झन  रंग हर बरेठिन ।

झूलना म झूलबो अउ कजरी ल गाबो
कजरी  के धुन बिकट मीठ हे बरेठिन ।

सावन- मन भावन के महिमा हे भारी
मइके के भुइयॉ नीक लागय बरेठिन ।

ऑछी  म  गाढा - पिंवरा - रंग चढाबे 
उमर - भर रंग ह झन छूटय बरेठिन ।

3 comments:

  1. Very nice post ...
    Welcome to my blog on my new post.

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  2. Replies
    1. धन्यवाद देवेन्द्र ! तुम गुरमटिया में आए तुम्हारा स्वागत है ।

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