
ऑंखी म आ के समा ओ निंदिया आ जा ओ आ जा
नोनी ल लोरी सुना ओ निंदिया आ जा ओ आ जा।
नोनी हर दिन भर खेलिस कूदिस हे
अँगना अउ परछी ल एक करिस हे ।
नवा बल बुध देहे आ ओ निंदिया आ जा ओ आ जा
नोनी ल लोरी सुना ओ निंदिया आ जा ओ आ जा ।
गोड झन बजाबे चुपे - चुप आबे
सुरुज ऊए के पहिली तैं हर जाबे ।
किस्सा कहानी सुना रे निंदिया आ जा रे आ जा
अंचरा ओढा के सुता रे निंदिया आ जा रे आ जा ।
नोनी ल लोरी सुना रे निंदिया आ जा रे आ जा
झटकुन अब तैं हर आ रे निंदिया आ जा रे आ जा ।
शकुन्तला शर्मा , भिलाई [छ ग ]
अमृत-संदेश से साभार
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